How are you preparing / आप कैसे तैयारी कर रहे हैं ...

आपके जीवन में तैयारी कैसी हो यह कहानी इस प्रेरणा से प्रेरित होकर लिखी गयी हैं। कुछ  समय  पहले  की  बात  है , ठन्डे प्रदेशों  में  एक  किसान  रहता  था।  उसे  अपने  खेत  में  काम  करने  वालों  की  बड़ी  ज़रुरत  रहती  थी  लेकिन  ऐसी  खतरनाक  जगह , जहाँ  आये  दिन  आंधी – तूफ़ान  आते  रहते हों , कोई  काम  करने  को  तैयार  नहीं  होता  था। 

किसान  ने  एक  दिन  शहर  के  अखबार  में  खबर  दिया  कि  उसे   खेत  में  काम  करने  वाले एक मजदूर की  ज़रुरत  है।  किसान से मिलने कई  लोग  आये  लेकिन  जो भी  उस  जगह  के  बारे  में  सुनता  , वह काम  करने  से  मना   कर  देता था।  अंततः  एक  सामान्य  कद  का  पतला -दुबला  व्यक्ति  किसान  के  पास  पहुंचा। किसान  ने  उससे  पूछा ,“ क्या  तुम  इन  परिस्थितयों  में  काम  कर  सकते  हो ? ”

व्यक्ति ने उत्तर दिया - " हाँ  , बस जब  हवा चलती  है  तब  मैं  सोता  हूँ। "

किसान  को  उसका  उत्तर  थोडा अजीब  लगा  लेकिन  चूँकि  उसे  कोई  और  काम  करने  वाला  नहीं  मिल  रहा  था इसलिए  उसने  व्यक्ति  को  काम  पर  रख  लिया। 

मजदूर मेहनती  निकला  ,  वह  सुबह  से  शाम  तक  खेतों  में कठिन मेहनत  करता , किसान  भी  उससे   काफी  खुश संतुष्ट था। कुछ ही दिन बीते थे कि  एक   रात  अचानक  ही जोर-जोर से हवा बहने  लगी  , किसान  अपने  अनुभव  से  समझ  गया  कि  अब  तूफ़ान  आने  वाला  है। वह   तेजी  से  उठा  , हाथ  में  लालटेन  ली   और  मजदूर  के  झोपड़े  की  तरफ  दौड़ते हुए पहुँचा। 



जल्दी  उठो , देखते  नहीं  तूफ़ान  आने वाला  है , इससे  पहले  की  सबकुछ  तबाह  हो जाए कटी फसलों  को  बाँध  कर  ढक दो और बाड़े के गेट को भी रस्सियों से कास दो .” किसान  चीखा। 

मजदूर बड़े आराम से पलटा  और  बोला , “ नहीं  मालिक , मैंने  आपसे  पहले  ही कहा था  कि  जब  हवा  चलती  है  तो  मैं  सोता  हूँ। ”

यह  सुन  किसान  का  गुस्सा  सातवें  आसमान  पर  पहुँच  गया , मन में आया  कि  उस  मजदूर  को  गोली  मार  दे , क्योंकि उसने फसल के लिए बहुत लोन ले रखा था अन्य कृषि उपकरण के लिए इनशोरेन्स ले लिया था इसलिए फसल बचाना बहुत आवश्यक  था। 

भाग कर किसान खेत में पहुँचा।  किसान खेत में पहुंचा और उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह गयी , फसल  की गांठें  अच्छे  से  बंधी  हुई   थीं  और  तिरपाल  से  ढकी  भी  थी , उसके  गाय -बैल  सुरक्षित बंधे  हुए  थे। 

मुर्गियां  भी  अपने  घरों  में  थीं  , बाड़े  का  दरवाज़ा  भी  मजबूती  से  बंधा  हुआ  था।  सभी  चीजें  बिलकुल  व्यवस्थित  थी। नुक्सान होने की कोई संभावना नहीं बची थी। किसान  अब   मजदूर की ये  बात  कि  “ जब  हवा चलती है  तब  मैं  सोता  हूँ। " समझ  चुका  था।  और  अब  वो  भी  चैन  से   सो  सकता  था। 

शिक्षा - हमारी  ज़िन्दगी  में भी कुछ ऐसे तूफ़ान आने तय हैं , ज़रुरत इस बात की है कि हम  उस  मजदूर की  तरह पहले से तैयारी कर के रखें ताकि मुसीबत  आने  पर  हम भी चैन  से  सो सकें।  जैसे कि यदि कोई विद्यार्थी शुरू से पढ़ाई करे तो परीक्षा के समय वह आराम से रह सकता है, हर महीने बचत करने वाला व्यक्ति पैसे की ज़रुरत पड़ने पर निश्चिंत रह सकता है। 

तो चलिए हम भी कुछ ऐसा करें कि कह सकें – " जब हवा चलती है तो मैं सोता हूँ। "

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धन्यवाद !!!

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