Don't compare yourself to others (दूसरों से अपनी तुलना मत करें )

यह Story उन लोगों के लिए जो सफल होने का रास्ता खोज रहें हैं। यह story हमारे अंदर छुपी स्वयं के प्रति हीनता के भाव को भी बताएगी। हम सभी कभी न कभी यह प्रश्न स्वयं से पूछते ज़रूर हैं कि हम कब सफल होंगे।आखिर ऐसा क्या किया जाये कि हमें सफलता शीघ्र मिल जाए। इन सभी प्रश्नो का उत्तर मैं एक Story  द्वारा समझता हूँ। ...  

यह Story एक कौवे की हैं वह जंगल में खाने की तलाश में उड़ रहा था। उन दिनों कौवा अपनी Life में  बहुत संतुष्ट था। उसे लगता था वह जंगल का सबसे सुन्दर और खूबसूरत पक्षी हैं।  

जब वह उड़ते-उड़ते दूर निकल गया तो उसकी नज़र एक हंस पर पड़ी। हंस को देख कर कौवा सोच में था मैं अभी तक खुद को सबसे सुन्दर समझता था लेकिन यह  हंस कितना सुंदर लग रहा हैं। 

हंस की सुंदरता देख कर कौवे को बोले बिना रहा न गया। उसने हंस से कहा कि मैं खुद को अभी तक सबसे सुन्दर पक्षी समझता था।लेकिन तुम मुझसे से भी सुन्दर हो। तुम्हारा सफ़ेद रंग बहुत सुन्दर लगता हैं। 

हंस , कौवे से कहता हैं - मित्र मैं भी यही सोचता था।मैं सबसे सुन्दर हूँ लेकिन मैंने जब से तोते को देखा तो लगता हैं वही सबसे सुन्दर हैं। क्योंकि मेरे पास तो सफ़ेद रंग ही है। लेकिन तोते के पास हरा ,नीला रंग और लाल चोंच हैं। 

इतना सुनते ही कौवा तेज़ी से उड़ने लगा और तोते खोजते - खोजते  उसके पास पहुँचा। और कौवा तोते से बोला - मित्र तुम तो बहुत सुन्दर हो। तोता दुखी होकर बोला - मित्र मैं भी खुद को सबसे सुन्दर समझता था लेकिन मैंने जब से मोर को देखा हैं तो मेरी सुंदरता उसकी सुंदरता के सामने फीकी लगती हैं। क्योंकि मोर के पास बहुत सारे रंग ,मेरी नज़र में मोर ही दुनिया का सबसे सुन्दर पक्षी हैं। 

अब कौवा मोर को खोजने निकल पड़ा उसे जंगल में मोर नहीं दिखा और मोर को खोजने कौवा शहर में पहुँच गया वहाँ  मोर एक पिंजरे में बंद चिड़िया घर में मिला। 

मोर को देख कौवे ने मोर की प्रशंसा करना शुरू कर दी लेकिन मोर अपनी प्रशंसा सुनकर खुश नहीं हुआ। और मोर कौवे से बोला- मित्र  ऐसी सुंदरता का क्या फायदा। मैंने अपनी पूरी life इसी पिंजरें में विता दी हैं मैं तुम्हारी तरह पूरे जंगल में नहीं घूम सकता हूँ। 

मैंने तो सुना हैं कौवा ही ऐसा पक्षी जिसे कोई पिंजरे में बंद नहीं करता हैं। इस तरह देखा जाये तुम इस जंगल के सबसे भाग्यशाली पक्षी हो। तुम जहाँ चाहो ,वहाँ जा सकते हो , तुम अपने अनुसार कुछ भी कर सकते हो।

कौवे को पूरी बात समझ आ गयी थी कि वह कितना भाग्यशाली हैं।कुछ इसी तरह हमने जो सफलता का मापदंड  अपनी Life में तय किया।  वही हमें असली सफलता पाने ही नहीं देता हैं।  

यह Story हम पर भी लागू होती हैं। हम सभी स्वयं पर और अपने लक्ष्य पर ध्यान न देकर दूसरों से तुलना करने में लग जाते हैं हम सोचते उनके पास इतनी सारी सुख सुविधा की वस्तु हैं उनके पास इतना धन हैं। दूसरे हमसे कितना अधिक बुद्धिमान हैं। हम सदा दूसरों को बारे  सोचकर और दूसरों से Compare कर अपने लक्ष्य पर ध्यान नहीं देते हैं और असफल हो जाते हैं। 

हम अपनी Life का बहुत सारा समय दूसरों से Compare करने में ही बर्बाद कर देते हैं और पीछे रह जाते हैं। इसलिए हमे दूसरें के बारें में न सोचकर , ईश्वर ने हमें जो Resources  उपलब्ध करायें हैं उनका सदुपयोग कर सफल होने का प्रयास करना चाहिए। 

अगर आपको हमारी Story अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ भी Share कीजिये और Comment में अवश्य बताये की हमारी Story आपको  कैसी लगी।

धन्यवाद !!!

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