Importance of Excellence / What is superiority / श्रेष्ठता क्या हैं ...

आज मैं बात करूँगा श्रेष्ठता क्या होती हैं ,आखिर हर कोई श्रेष्ठता क्यों प्राप्त करना चाहता हैं ,इसे समझने के लिए एक कहानी लेकर आया हूँ। ...

सर्दी के मौसम में कुछ बन्दर ठिठुर रहे थे तभी उन्हें एक जुगनू दिखाई दिया ,उससे प्रकाश आ रहा था। बंदरों को ऐसे लग रहा था कि वह उड़ता हुआ अंगारा हैं।

उन सभी बंदरों ने बहुत प्रयास करके उस जुगनू को पकड़ा और सूखी लकड़ी पर रख दिया और फूकने लगे ताकि लकड़ी में आग लग सके और सर्दी से उनका वचाव हो पाए।

कुछ ही देर में  जुगनू का प्रकाश आना बंद हो गया ,तभी बंदरों को दूसरा जुगनू  दिखाई दिया और उसे भी पकड़ कर वही कृत्य फिर से किया और परिणाम भी वही आया मतलब कुछ समय बाद दुसरे जुगनू  से भी प्रकाश आना बंद हो गया और लकड़ी में आग भी न लगी।

पास के पेड़ पर एक चिड़िया बैठी थी  वह ध्यान से बंदरों के सर्द से बचने के प्रयास देख रही थी. चिड़िया ने कहा-बंदरों ये जुगनू हैं ,देखा नहीं मुझे इसे खाते  हुए। अगर ये अंगारा होता तो ,मैं इसे कैसे खा पाती।

आगे चिड़िया कहती हैं - तुम सब बेकार परिश्रम कर रहे। भला जुगनू से भी आग उत्पन्न हो सकती हैं। चिड़िया ने बन्दर से कहा कि तुम सबके मिलकर फूकने पर भी आग नहीं लगा सकते हो। बंदरों को यह सुनकर गुस्सा आया और बंदरों ने गुस्से में आकर  चिड़िया को मार दिया।

अब विचार करें तो आप जान पाएंगे कि आपकी भी आधी ज़िन्दगी बेकार के काम में बीत जाती हैं ,कोई घंटो अपना चेहरा आईने में निहारता रहता हैं और अभिनेता बनने निकल पड़ता हैं। life  बीतती चली जाती हैं लेकिन  सफलता नहीं मिल पाती हैं।

कुछ लोग बड़े काम  करने का स्वप्न सजोए  होते हैं और छोटा काम करना नहीं चाहते हैं और दरिद्र बन जाता हैं।

यहाँ सम्पूर्ण कहानी से दो प्रश्न उत्पन्न होते हैं ,
  1. क्या जब आप कोई स्वप्न लेकर प्रयास करते हैं तो अवश्य सफल होते हैं। 
  2. दूसरी ओर यह भी कहा जाता हैं कि आपके  सारे देखे हुए सभी सपने सच नहीं होते हैं। 
कहने आशय यह हैं कि समय आने पर जुगनू और अंगारे का भेद समझना आवश्यक हैं ,आखिर इस दुविधा का उपाय क्या हैं।

कहानी में भी बंदरों ने यही कहा था ,हम इतने ताकतवर हैं।और तुम इतनी छोटी सी चिड़िया हो। हमे तुम्हारी सलाह की कोई आवश्कता नहीं हैं इस मिथ्या भ्रम में रहकर आज भी बन्दर रूपी मनुष्य जुगनू को फूक कर लकड़ी में आग लगाने का कभी न परिणित होने वाला प्रयास कर रहा हैं।

 

जब मनुष्य यह कहने लगे कि उसे किसी के सुझाव की आवश्कता  नहीं हैं। इस संसार में उससे अधिक बुद्धिमान कोई नहीं हैं। उसके सारे निर्णय 100 प्रतिशत सही हैं यही श्रेष्ठता की भावना हैं। और इस श्रेष्ठता की भाव से आज भी कई मनुष्य जुगनू से लकड़ी में आग लगाने का प्रयास कर रहे हैं। और सर्दी में ठिठुर रहे हैं।

इस कहानी का आशय आपको हतोत्साहित करना नहीं हैं लेकिन यह स्पष्ट करना हैं कि सही दिशा में उचित प्रयास करने पर ही श्रेष्ठता प्राप्त की जा सकती हैं। 

                        अगर आपको हमारी Story अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ भी Share कीजिये और Comment में अवश्य बताये की हमारी Story आपको  कैसी लगी।

धन्यवाद !!!

Post a Comment

2 Comments