Motivational Story - " Learn From Eagle " / प्रेरक कहानी -" बाज़ से सीखो " ...

आज मैं बाज़ की life से जुड़ी एक प्रेरणादायक story लेकर आया हूँ जो आपके life को एक नया मोड़ दे सकती हैं। जब हमे लगने लगे की life में अब कुछ नहीं हो सकता और हम थक हार कर बैठ जाते हैं तब ये प्रेरणादायक story आपको अवश्य नयी चेतना ,ऊर्जा प्रदान करेगी ...



बाज़ जब वृद्ध होने लगता हैं तब उसे अपनी life का एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता हैं। वृद्धावस्था प्रारम्भ होने के कारण उसके शरीर के कुछ अंग प्रभावहीन होने लगते हैं।
  • पंजे ढीले पड़ने लगते हैं जिससे शिकार पकड़ने में कठिनाई होती हैं ,
  • चोंच आगे की ओर मुड़ जाने से भोजन में व्यवधान उत्पन्न करने लगती हैं ,
  •  पंख में वजन बढ़ने से वे पूरी तरह खुल नहीं पाते ,जिससे उसे अधिक ऊँचा उड़ने में  कठिनाई होने लगती हैं। और पंख उसकी उड़ान को सीमित कर देते हैं। 
          अब आप विचार करें बाज़ के life के अतिमहत्वपूर्ण काम भोजन को खोजना ,पकड़ना और उसे खाना सभी प्रकिया वृद्ध होने से बाधित होने लगती हैं।  इस स्थिति में उसके पास तीन option ही होते हैं। 
  1. देह त्यागने की प्रतीक्षा करे , 
  2. अपना मूल स्वभाव छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्भर रहे ,  
  3. अपने को पुनर्स्थापित  करे।       
यहाँ पहले दोनों option बहुत सरल हैं और तीसरा option उतना ही कठिन और पीड़ादायक हैं परन्तु बाज़ तीसरा option स्वयं को पुनर्स्थापित करना चुनता हैं। इसके लिए वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता हैं वहाँ घोसला बनाता हैं। और अपने आने वाले भविष्य के लिए स्वयं को तैयार करता हैं। 

सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता हैं ताकि नयी धारदार चोंच पुनः उग  जाये ,इसमें बहुत पीड़ा का अनुभव भी बाज़ को करना पड़ता हैं। इसी तरह वह शिथिल पड़े पंजे तोड़ देता और प्रतीक्षा करता है उनके पुनः उग आने की। 

नयी चोंच और पंजे आने पर वह वजनदार पंखो को भी नोंच-नोंच कर निकाल देता ताकि नए पंख निकल आये। लगभग 6 महीने की कठिन परिश्रम और पीड़ादायक प्रकिया के बाद बाज़ को वही भव्य और ऊँची उड़ान पुनः प्राप्त हो जाती हैं। और आने वाले वर्षो में उसी सम्मान , गरिमा और स्वभाविक लक्षण के साथ अपनी life जीता हैं। 

बाज़ की कुछ समय की पीड़ा और कष्ट उसे भविष्य में आने वाली चुनौती के लिए तैयार करती हैं और यही अंतर बाज़ को गिद्ध से भिन्न और श्रेष्ठ बनाता  हैं।

इसी प्रकार , समय बीतने पर मनुष्य की इच्छा (desire),कल्पना (imagination) , सक्रियता (activeness) भी निर्बल पड़ने लगती हैं इसलिए मनुष्य को भूतकाल के  भार को त्याग देना चाहिए और सदा सक्रिय होकर अपनी कल्पनाशक्ति को पहचान कर उड़ान भरनी चाहिए।



इस story से यह प्रेरणा भी मिलती हैं कि मन से किया गया काम व्यक्ति को सफल बनाता हैं। और अरुचि से किये काम के पूर्ण होने में सदा संदेह बना रहता हैं। 

किसी काम के प्रति लगन और रूचि होने पर मार्ग की बाधा का प्रभाव आप के ऊपर नहीं होता हैं वही अरुचि पूर्ण काम करने पर आपको थकावट स्वतः होने लगती हैं। 

आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में गरिमापूर्ण सम्मान ,सफलता पाने के लिए आपको प्रवीण बनना हैं यानी आप खुद को इतना कुशल बनाये की बाकी लोग से आगे निकल जाए। इसलिए बाज़ की तरह संघर्ष करने के लिए मनुष्य को  तैयार रहना चाहिए ताकि भविष्य में सफलता की उड़ान भी भर पाए। 

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धन्यवाद !!!

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