Motivational Story - " Inspiration" / " प्रेरणा "

आज मैं ऐसी प्रेरक कहानी लेकर आया हूँ जो आपको नयी दिशा प्रदान करेगी ,आपकी  Life  में फैली हताशा दूर करने का प्रयास करेगी। आपको चीज़ों को समझने का सही नजरिया देंगी। 

ये कहानी दो भाईयों  की हैं दोनों भाई किसी शहर में रहते हैं इनमे से एक  भाई बहुत पैसे कमाता हैं उसका  शहर में बहुत बड़ा Business हैं।वह अपने परिवार में सदा खुशनुमा माहौल बनाये रखता था , वह Charity ,समाज सेवा  भी करता हैं सभी की मदद के लिए निःस्वार्थ भाव से खड़ा रहता हैं।

वही दूसरा भाई हमेशा नशे में धुत्त रहता हैं , Drugs  का आदि हो चुका  था और अपने परिवार में भी ख़राब माहौल बनाये रखता हैं कोई काम धंधा नहीं करता हैं और  इस पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज़ हैं। 


अब प्रश्न ये आता आखिर एक ही माता पिता की संतान होने पर उनमे इतना अंतर क्यों हैं उनका पालन पोषण  एक ही तरीके से किया गया , दोनों को एक ही School , College से  शिक्षा ली। तो दोनों में इतना अंतर क्यों आया ?
  • आखिर कौन सी बात एक भाई को सफल और सत्कर्मी बना रही और दूसरे को असफल और अपराधी ?
  • क्या समाज इनमे अंतर का कारण  हैं वे कौन से तत्व या कारक जो इन  दोनों भाईयों  के आचरण में अंतर ला रहे  हैं ?

जब सफल भाई से उसकी सफलता की कारण  पूछा तो उसने कहा -" मुझे सफल मेरे पिता ने बनाया " और दूसरे भाई से उसके आपराधिक होने का कारण  पूछा तो उसने भी कहा -" मुझे इसकी सीख अपने पिता से मिली। "

अब सोचने का विषय यह दोनों के प्रेरणा  एक ही हैं लेकिन उनमे एक सफल हैं तो दूसरा असफल। सफल  भाई कहता हैं मेरे पिता बचपन में शराब पीकर आते और हमे पीटते थे मेरे आसपास के लोग भी उनसे कभी अच्छे से बात भी नहीं करते थे तब मैंने सोचा बड़ा होकर मैं ऐसा नहीं बनूँगा। मैंने अच्छे से पढ़ाई  की धन कमाया और अपने जैसे गरीब लोगो की मदद में लग गया।       
                  दूसरे भाई से पूछा गया कि आपके प्रेरणा आपके पिता कैसे बने। तो दूसरा भाई कहता हैं  बचपन मेरे पिता नशा कर आते थे और पीटते थे मैंने सोचा शयद यही जीवन हैं शायद यही पुरुषत्व हैं और परिवार का मुखिया होने का यही सही तरीका हैं। और आज मैं जो कुछ भी हूँ इसका श्रेय मेरे पिता के लिए हैं। 

अब आप देख रहे परिस्थिति तो दोनों के साथ एक ही हैं पर नजरिया मतलब उस स्थिति को आपको अपनी ल Life में किस तरीके से ग्रहण करना हैं ये आप स्वयं पर निर्भर करता हैं या तो आप उसकी सकारात्मक से लेते हुए अपने Life में सफल होते हैं या नकारात्मकता के साथ गर्त में पहुँच  जाते हैं।

याद रहे मानव का स्थान माध्यम श्रेणी में आता हैं या तो अपने कर्मो से पशुवत व्यवहार कर पशु बन जाता हैं और निम्न श्रेणी में चला जाता हैं या सत्कर्म करके महात्मा या देवत्व को पा लेता हैं। और उच्च श्रेणी प्राप्त करता हैं। मानव के अंदर सभी सम्भावना विधमान  हैं कि  वह अपनी Life को उन्नति या अवनति किसी भी दिशा में ले जा सकता हैं।

                                                               धन्यवाद !!!

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