How to find unexpected success /(अप्रत्याशित सफलता कैसे पायी जाए)

आज मैं आप सभी से अप्रत्याशित सफलता कैसे पायी जाए इस विषय से सम्बंधित कहानी लेकर आया हूँ अप्रत्याशित सफलता का आशय  हैं ऐसी सफलता जिसके बारे में न तो आपने ,आपके नाते रिश्तेदारों ने और न ही समाज ने आपसे कभी अपेक्षा  की हो। इसका आशय जीवन में अनोखी  छलाँग  लगाने से हैं।


एक बार की बात हैं एक महात्मा से उनके अनुयायी ने प्रश्न किया - भगवन ,कई लोग दुर्वल और साधारण होते हुए भी कठिन परिस्थिति को मात देकर बड़ा कार्य कर लेते हैं और वही कुछ लोग कई बार अच्छी परिस्थिति होने पर भी ,साधन संपन्न लोग भी ऐसे कार्य करने में असफल होते हैं ऐसा क्यों ? इसका कारण  क्या हैं ? क्या पूर्वजन्म के कर्म अवरोध बनकर खड़े हो जाते हैं ? क्या भाग्य ही सबकुछ हैं ?

महात्मा एक कहानी के द्वारा इसका उत्तर देते हैं और कहते हैं , विराटनगर के राजा श्रुतकीर्ति के पास  लोहसांग नाम का एक हाथी था इसके बल पर उन्होंने कई युद्धों में विजय प्राप्त की थी। 

बचपन से ही लोहसांग नाम के हाथी को इस प्रकार प्रशिक्षित किया गया था कि वह युद्ध कला में बड़ा प्रवीण हो गया था सेना में आगे चलते हुए जब वह अपनी प्रचण्ड हुंकार भरता हुआ चलता तो उसकी शान देखते ही बनती थी।

धीरे धीरे समय के साथ लोहसांग बूढ़ा होता गया उसकी काया और हुंकार शिथिल हो गयी अब राजा श्रुतकीर्ति उसे युद्ध में नहीं ले जाते थे। अब वह हाथीशाला में ही रहता था उपयोगिता और महत्त्व कम होने पर उसकी देखरेख में भी कोताही होने लगी। उसे दिए जाने वाले भोजन में कमी कर दी गयी थी और उसके देखरेख के लिए एक बुजुर्ग को लगाया गया जो कभी कभी तो उसे भोजन देना भी भूल जाता था। 

महात्मा आगे कहानी बताते हुए कहते हैं एक बार भूख से व्याकुल होकर वह पास के सरोवर में पानी पीने के लिए गया तो वह वहाँ दलदल में फस गया। वह जितना भी निकले की कोशिश करता ,वो और दलदल में फस जाता। बूढ़ा  होने के कारण उसके सारे प्रयास निष्फल हो गए थे जब यह बात राजा श्रुतकीर्ति को बताई गयी  तो उन्होंने कई प्रयास  करवाए ,लेकिन लोहसांग हाथी दलदल से बाहर नहीं आ पाया। 

जब सारे प्रयास करने पर भी वो नहीं निकला तब एक विद्वान मंत्री ने  युक्ति सुझाई उसने उस सरोवर के चारो ओर युद्ध क्षेत्र की तरह माहौल बनाया सेना के बस्त्र में सैनिक बुलाये।  युद्ध के नगाड़े बजने लगे और इस प्रकार दृश्य से लोहसांग हाथी भी जोश आ गया और हुंकार मार कर वह स्वतः ही उस दलदल से बाहर आ गया और फिर बड़ी मुश्किल से उसे नियंत्रित किया गया। 



इस कहानी को सुनाकर महात्मा अपने अनुयायी से कहते है - " इस संसार में मनोबल ही सबसे बड़ा बल हैं अगर यदि किसी व्यक्ति का मनोबल जाग उठे तो असहाय और बलहीन  भी असंभव लगने बाले काम को कर देते हैं इसलिए मनोबल से अप्रत्याशित सफलता भी सहज पायी जा सकती  हैं। "

अगर आप भी अपना मनोबल ऊँचा कर ले तो साधन , सुख , सुविधा के अभाव में भी अप्रत्याशित सफलता पा सकते हैं। इसलिए मनोबल को बढ़ाये ,अपने आत्मविश्वास को बनाये ,सफलता की राह पर अग्रेशित हो और उन अप्रत्याशित सफलता को हासिल करिये जिनके बारे में आपके आसपास के लोगो ने सोचा भी न हो।


                                 " प्रयत्न इतनी शांति से करें कि सफलता शोर मचा दे "

                                                                  धन्यवाद !!!

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